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वेश्यावृति केस के वारंटी संजय और शबनम सिंह शहर के बीचो बीच जिला पुलिस की कार्यशैली को खुलेआम चुनौती देकर कर रहे प्रेस कांफ्रेंस दागदार रहा है इनका दामन

जमशेदपुर : वर्ष 2002 से 2009 के बीच जमशेदपुर के साकची क्षेत्र में एक दलाल हुआ करता था l जिसकी माली हालत इतनी खराब थी की नंगा नहायेगा क्या और निचोडेगा क्या l जमशेदपुर के वेश्यावृति गिरोह पर उसकी नज़र पड़ी और इस मेहनती इंसान को एक काम मिल गया l उसके बाद उसने इस क्षेत्र में इतना नाम कमाया की प्रशासन के रडार पर आ गया l 2002 से 2009  के बीच इस व्यक्ति के खिलाफ जिला प्रशासन के पास 100 से अधिक शिकायतों का अम्बार लगा हुआ था l जब पुलिस प्रशासन ने इसपर अपनी पकड़ बनानी शुरू की तो इसके शातिर दिमाग में एक आईडिया आया और उसने 2009 में वकालत के पेशे को अपनाया l मकसद केवल एक था अपने सेक्स रैकेट को कानून की नज़र से सुरक्षा देना l वकालत जैसे पवित्र पेशे की आड़ में अपने सफेदपोश अपराध का काला साम्राज्य फैला रहे इस आदमी का नाम है नाम है संजय सिंह l और इस गोरखधंधे में इसकी हमकदम पत्नी शबनम सिंह l वर्तमान समय में ये दोनों पति -पत्नी जमशेदपुर जिला न्यायालय में लंबित वेश्यावृति के केस नंबर 6380 / 2022 में वारंटी हैं l मगर अपने अवैध धंधे की हनक इतनी की शहर के बीचो- बीच पत्रकारों के सामने जिला पुलिस की कार्यशैली को खुलेआम चैलेन्ज करते हुए प्रेस कांफ्रेंस तो कर ही रहे है l उस व्यक्ति को आइना दिखाने का प्रयास कर रहे हैं जिसने अपनी बेबाक पत्रकारिता के बल पर जमशेदपुर में मिसाल कायम की है l स्पाई पोस्ट एवं तहलका न्यूज के मुख्य संपादक विनोद सिंह पर कीचड उछालने से पहले संजय सिंह और शबनम सिंह ने यह नहीं सोचा होगा की अब उनके गुनाहों का हिसाब किताब शुरू हो जायगा l

इसकी आदत है की जब भी कोई इमानदार पत्रकार इसके काले कारनामो की कलई खोलना शुरू करता है तो दोनों पति पत्नी छाती पीट -पीटकर खुद को बेगुनाह और सामने वाले को अपराधी साबित करने की कोशिश करते हैं l जिस विनोद सिंह पर ये लोग चार्जशीटेड होने और रुपये मांगने का आरोप लगा रहे हैं l उसे साबित करने के लिए इनके पास कोई सबूत नहीं है l विनोद सिंह ने इनसे सीधा सवाल किया है की अगर दोनों पति -पत्नी में दम है तो मकान कब्ज़ा पैसे मांगने सहित जितने भी आरोप उनलोगों ने उनपर लगाये हैं उन्हें साबित करके दिखाएँ l उन्होंने कहा की इनके ऊपर किये गए मुक़दमे में लगातार हारते रहने के कारण संजय सिंह और शबनम सिंह का दिमागी संतुलन बिगड़ गया है और अब उच्च न्यायालय में भी इन्हें केस हारने का डर सता रहा है l अपनी उसी कारस्तानी को छुपाने के लिए ये विधवा विलाप कर रहे हैं l मगर इन्हें बेनकाब करने की ये मुहीम रुकने वाली नहीं है l अब इन्हें जिला प्रशासन और जनता को जवाब देना ही पड़ेगा l

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Author: Tehelka News

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