जमशेदपुर : जमशेदपुर के काशीडीह निवासी अशोक सिंह वर्ष 2009 में हुई एक सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हुए l जख्म गहरा था और बचने की सम्भावना नगण्य थी l टाटा मुख्य अस्पताल के न्यूरो सर्जन डॉ० फ़तेह बहादुर सिंह ने इस स्थिति में मरीज को बेहतर इलाज के लिए बाहर ले जाने की सलाह दी l चिकित्सक के निर्देश पर भाई की जान बचाने के लिए जमशेदपुर पूर्वी के तत्कालीन विधायक निधि से संचालित होने वाली टवेरा गाड़ी जिसे एंबुलेंस में परिवर्तित किया गया था 8200/- रुपए का शुल्क देकर उड़ीसा के कटक में विश्व प्रसिद्ध न्यूरो चिकित्सक डॉक्टर सनातन रथ से इलाज के लिए छोटे भाई विनोद सिंह रवाना हुए । महीनों के इलाज और देखभाल से अशोक सिंह की जिंदगी तो बच गई परंतु चोट जानलेवा होने के कारण अशोक सिंह मानसिक रूप से विक्षिप्त हो गए ।
इस घटना के बाद अशोक सिंह की नौकरी छूट गई और उनके असामान्य व्यवहार के कारण वह बेरोजगारी का शिकार हो गए । आर्थिक अभाव से घिर जाने के कारण अशोक सिंह की पत्नी रेखा देवी ने यहां से शुरू किया अपने शातिराना चाल को चलने का खेल ।
मानसिक रूप से विक्षिप्त अशोक सिंह और शातिर रेखा सिंह ने शुरू किया अपने सास ससुर और देवर देवरानी को प्रताड़ित करने का खेल, धमकी देने का खेल, कैंसर पीड़ित सास के साथ मारपीट का खेल, ससुर कुंवर सिंह और देवर विनोद सिंह सहित देवरानी को झूठे मुकदमे में फंसाने का खेल । इन्ही षड्यंत्रों और मानसिक यातना से से जूझते और कठिन पारिवारिक हालातों में दबी हुई कैंसर पीड़ित सास का 2015 में निधन हो गया। सास के निधन के बाद निशाने पर आए ससुर, देवर और देवरानी।
ससुर कुंवर सिंह को मानसिक रूप से इतना प्रताड़ित किया गया कि मजबूरन इन्हें प्रशासन से अपनी सुरक्षा की गुहार लगानी पड़ी और 2015 में साकची थाना में अपने विरुद्ध हिंसा और प्रताड़ित करने का मामला साकची थाना में दर्ज करवाना पड़ा l
यह मामला आज भी न्यायालय में विचाराधीन है, जिसका नंबर केस नंबर – 662/15 है । ससुर से पैसे ऐंठने की अपनी योजना को असफल होता देखकर रेखा ने अपनी ओर से भी एक मामला साकची थाने में दर्ज कराया ।
न्यायालय में इस मामले की साढ़े दस वर्षों तक सुनवाई हुई और दिसंबर 2025 में न्यायालय ने वादी को फटकार लगाते हुए सभी को बरी कर दिया। इस केस का नंबर 663/15 रहा। माननीय विद्वान न्यायाधीश ने अपने आदेश में लिखा है रेखा सिंह दरअसल अपने हिस्से का बिजली का बिल देना ही नहीं चाहती है और स्वयं के हिस्से में किराएदार भी रखने के बावजूद किराएदार से बिजली का बिल लेकर खुद रख लेती हैं । सुनवाई में रेखा सिंह ने यह भी स्वीकार किया कि पूरे घर का बिजली का बिल देवर विनोद सिंह भरते हैं।


यही नहीं सास ससुर के देखभाल की जिम्मेदारी भी विनोद सिंह के ऊपर ही रही, जबकि टाटा स्टील कर्मी रहे ससुर द्वारा अपने सर्विस के उत्तराधिकारी के रूप में अशोक सिंह को पंजीकृत करवाया गया था l
इस मामले का एक पहलू यह भी है कि ससुर द्वारा केस दर्ज कराए जाने के बाद गिरफ्तारी के भय से बचने के लिए रेखा सिंह समझौते का नाटक कर कोर्ट से अपनी जमानत करवा ली और जमानत होने के बाद पुनः ससुर को पैसों के लिए धमकाने लगी और मुकदमा लड़ने का प्रयास कर अपने बयान को न्यायालय में दर्ज करवाया।
यह सारा घटनाक्रम विद्वान न्यायाधीश द्वारा दिए गए आदेश में दर्ज है। दरअसल रेखा देवी के देवर विनोद सिंह एक प्रतिष्ठित पत्रकार हैं और उनकी छवि को ठेस पहुंचाकर देवर विनोद सिंह से रुपए ऐंठने की योजना शातिर रेखा देवी ने बनाना शुरू किया ।
रेखा देवी ने जमशेदपुर शहर में वेश्यावृत्ति का किंगपिन माने जाने वाले तथाकथित अधिवक्ता संजय सिंह के साथ मिलकर विनोद सिंह की सामाजिक प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाना शुरू किया।
यहाँ गौरतलब बात ये है की अशोक सिंह तो मानसिक रोगी हैं परंतु वेश्यावृत्ति का बदनाम खिलाड़ी संजय सिंह के साथ रेखा देवी का गठबंधन कई शंकाओं को जन्म दे रहा है।

